शनिवार, 30 मई 2020

चुप्पियाँ-11


📚

*चुप्पियाँ-11*

चुप्पी, निरंतर

सिरजती है विचार,

'दूधो नहाओ,

पूतो फलो'

का आशीर्वाद

चुप्पी को

फलीभूत हुआ है!

( 8:11 बजे, 2.9.18)
( कवितासंग्रह *चुप्पियाँ* से)

संजय भारद्वाज
writersanjay@gmail.com
9890122603

# दो गज़ की दूरी
   बहुत है.ज़रूरी।

✍️🙏🏻

शुक्रवार, 29 मई 2020

निठल्ला चिंतन


🌻📚
अहं ब्रह्मास्मि।...सुनकर अच्छा लगता है न!...मैं ब्रह्म हूँ।....ब्रह्म मुझमें ही अंतर्भूत है।

ब्रह्म सब देखता है, ब्रह्म सब जानता है।

अपने आचरण को देख रहे हो न!

...अपने आचरण को जान रहे हो न!

बस इतना ही कहना था।

थोड़े लिखे को अधिक बाँचना, सर्वाधिक आत्मसात करना।

संजय भारद्वाज
writersanjay@gmail.com

28.5.2020, प्रात: 10 बजे

*# निठल्ला चिंतन*

🙏🏻✍️🙏🏻

बुधवार, 27 मई 2020

कहानी (लघुकथा)


कहानी

'यह दुनिया की सबसे लम्बी कहानी है। इसे गिनीज बुक में दर्ज़ किया गया है,.' जानकारी दी जा रही थी।

वह सोचने लगा कि पहली श्वास से पूर्णविराम की श्वास तक हर मनुष्य का जीवन एक अखंड कहानी है। असंख्य जीव, अनंत कहानियाँ..। हर कहानी की लम्बाई इतनी अधिक कि नापने के लिए पैमाना ही छोटा पड़ जाए।...फिर भला कोई कहानी दुनिया की सबसे लम्बी कहानी कैसे हो सकती है..?

संजय भारद्वाज
writersanjay@gmail.com

(प्रातः 6:30 बजे, 26.5.2019)

इस कहानीकार का हर कहानीकार को नमस्कार।

विचारणीय


विचारणीय

मैं हूँ
मेरा चित्र है;
थोड़ी प्रशंसाएँ हैं
परोक्ष, प्रत्यक्ष
भरपूर आलोचनाएँ हैं,
मैं नहीं हूँ
मेरा चित्र है;
सीमित आशंकाएँ
समुचित संभावनाएँ हैं,
मन के भावों में
अंतर कौन पैदा करता है-
मनुष्य का होना या
मनुष्य का चित्र हो जाना...?
प्रश्न विचारणीय
तो है मित्रो!

संजय भारद्वाज
writersanjay@gmail.com

(शुक्रवार, 11 मई 2018, रात्रि 11:52 बजे)

मंगलवार, 26 मई 2020

चुप्पियाँ-10


📚🍁
*चुप्पियाँ- 10*

.......पूर्ण से
पूर्ण चले जाने पर भी
पूर्ण ही शेष रहता है,
चैनलों पर सुनता हूँ
प्रायोजित प्रवचन
चुप हो जाता हूँ..,
सारी चुप्पियाँ
समाप्त होने के बाद भी
बची रहती है चुप्पी,
पूर्णमिदं......
........पूर्णमेवावशिष्यते!

*संजय भारद्वाज*
writersanjay@gmail.com

(प्रातः 7:49 बजे, 2.9.18)
🙏🏻✍️

रविवार, 24 मई 2020

अंतर्प्रवाह


*अंतर्प्रवाह*📚

हलाहल निरखता हूँ
अचर हो जाता हूँ,
अमृत देखता हूँ
प्रवाह बन जाता हूँ,
जगत में विचरती देह
देह की असीम अभीप्सा,
जीवन-मरण, भय-मोह से
मुक्त जिज्ञासु अनिच्छा,
दृश्य और अदृश्य का
विपरीतगामी अंतर्प्रवाह हूँ,
स्थूल और सूक्ष्म के बीच
सोचता हूँ मैं कहाँ हूँ..!

संजय भारद्वाज
writersanjay@gmail.com
9890122603

(रात्रि 3: 33,  23.3.2020)

# दो ग़ज़ की दूरी
    है बहुत ज़रूरी।
🙏🏻✍️

शनिवार, 23 मई 2020

चुप्पियाँ -9


🌷📚

*चुप्पियाँ- 9*

मेरी चुप्पी का
जवाब पूछने
आया था वह,
मेरी चुप्पी का
एन्सायक्लोपीडिया
देखकर
चुप हो गया वह!

*संजय भारद्वाज*
writersanjay@gmail.com

( प्रात: 9:45, 2.9.2018)
(कवितासंग्रह *चुप्पियाँ* से)

# दो गज़ की दूरी,
    है बहुत ज़रूरी।
🙏🏻✍️